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W/02 — Poems & Quotes
Dr. Preetesh ke kalam se
Zindagi ke safar se nikli kavitayein aur quotes — original works by Dr. Preetesh Anand.
© Dr. Preetesh Anand
कविता · शहर
शहर में हो या सपने में शहर को देखते हो ।
शहर खूबसूरत है या खूबसूरत शहर को दुड़ते हो ।
नदी, झील, पार्क, हरियाली, सब ख़्वाब बनते जा रहे हैं ।
चारों तरफ बस दिवार बनते जा रहे ।
वो दिवार, जो इंसानियत के दीवार ख़त्म करता जा रहे,
गर्म सर्द बरसात सब एक जैसे होते जा रहे,
शहर में हो या सपने में शहर को देखते हो ।
हम ये कैसे शहर की ओर जा रहे हैं ।
या शहर को सपने में बना रहे हैं ।
वो इंसान अग़ल-बग़ल, बग़ल-अग़ल ना किसी को किसी की ख़बर ।
वो ख़बर, जो अस्पताल, स्कूल और समाज के सरोकार से है बेख़बर ।
शहर में हो या सपने में शहर को देखते हो ।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · ट्रोल ट्रॉमा सेंटर
मैं प्यार ही तो करता हूँ, मैं प्यार में ही जीता हूँ ।
तब भी मुझे ट्रोल किया जाता है ।
गालियों से गिला कहाँ मिटता है ?
संवाद ही है, हर विवाद का समाधान ।
देश प्रेम का ढोंग सही है,
कभी तो, देश के लोगों से प्रेम कर लो ।
हमने तो लोकतंत्र को भाईचारे से खड़ा किया था ।
आख़िर कोई देश एक दूसरे से लड़ के बनते देखा है ?
जिस एक डिसेंट का विरोध कर रहे हो,
कल वही आवाज़, भविष्य बचाएगा ।
आज में जीने वालो, कल किसी और का होगा ।
कभी इस प्रकृति पर स्थिरता देखी है ?
TV से अपने विचार बनाने वालो,
TV आपको तालिबानी बना रहा है,
TV आपको गालियाँ देना सिखा रहा है,
TV हमें तबाही की ओर ले जा रहा है ।
चेक करें, क्या आपको TV हो गया है ?
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · तल्ख़ बातें
तल्ख़ है इनकी बातें,
तख़्त हिला देगी ।।
लोकतंत्र के बनने में,
हर एक की है ज़िम्मेदारी, हर एक की है भागीदारी ।।
सत्ता के शिखर से जो लोग तमाशा कर रहे हैं,
सत्ता के सनक का जो लोग तमाशा देख रहे हैं,
हर एक की आएगी बारी,
हर एक की है भागीदारी, हर एक की है ज़िम्मेदारी ।।
तल्ख़ है मेरी बातें,
तख़्त हिला देगी ।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · व्यथा
परी हूँ मैं, उड़ने की इजाज़त भी है,
बस पंखों को कतर दिया गया है ।
मोहब्बत हूँ मैं, प्यार सिखाया भी गया है,
बस दोस्तों के साथ घूमने पर, ट्रोल बनाया है ।
सुंदर हूँ मैं, सुंदर देखना भी चाहते हैं,
बस अपनी पसंद के कपड़े पहनने पर, आवाज़ उठाया है ।।
लक्ष्मी हूँ मैं, फिर भी घर से विदाई के वक़्त,
लक्ष्मी का मोल लगाया है ।।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · ज़िद करो
ज़िद करो, ज़िद्दी बनो,
हर मुश्किल आसान है ।
जिसको पाने की इच्छा हो,
पा लोगे, चाहे वो आसमान हो ।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
शायरी · Romeo स्काउट
हर वक़्त की साज़िश है,
सिलसिला मिट जाए ।
इश्क़-ए-दीदार का बस सिला रह जाए,
पर सिलसिला मिट जाए ।।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · Farmer Concern
ना आयाम था, ना आराम,
फिर एक आया नया फ़रमान ।।
ना किसी ने ज़िक्र की, ना किसी ने माँग,
फिर भी लेकर आए, एक नया फ़रमान ।।
ना सही दाम है, दमन का पूरा इतिहास है,
फिर भी भरोसा सरेआम ।।
नया नॉवेल बाज़ार, मुनाफ़े का हिसाब है,
किस तरफ ले जाएगा, शोर है सरेआम ।।
एक ही तो आस है — खेत अपना, बाज़ार अपना और सही दाम,
किस तरफ हम जा रहे, बिकने को सरेआम ।।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · गुम हो गए
घूमें ऐसे कि गुम हो गए ।
हवाओं के शोर में,
पहाड़ों के मोड़ में,
नदियों की धार में,
पक्षियों, पत्तों की कलकलाहट में,
हम गुम हो गए ।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · ज़िद है
है उसका पागलपन, जो पागल बना जाता है,
है उसका प्यार, जो प्यार सिखा जाता है ।
है उसकी ज़िद, जो मुझे ज़िद्दी बनाती है ।
कभी रूठ भी जाऊँ तो, प्यार दिखाना, है उसकी ज़िद ।
कभी रूठ भी जाए तो, प्यार ही चाहे, उस वक़्त, है उसकी ज़िद ।
मैं उसको समझ या नासमझ कहूँ, प्यार या पागलपन कहूँ ।
बस इतना कहूँगा — है ज़िद तू, मेरी ज़िंदगी ।
ज़िद है ।।
— Dr. Preetesh Anand
© Dr. Preetesh Anand
कविता · चल निकल चलें
चल निकल चलें कहीं…
जहाँ घड़ी की सुइयाँ धीमी पड़ जाएँ,
और ज़िंदगी थोड़ी ठहर जाए ।
जहाँ बादल रास्तों से मिलते हों,
और बारिश कहानियाँ सुनाती हो ।
चल पड़े हैं हम बादलों के शहर की ओर…
शहरों के शोर से बहुत दूर ।
जहाँ रास्ते नहीं, यादें बनती हैं…
और सुकून हर मोड़ पर मिलता है ।
— Dr. Preetesh Anand
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